श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.9.21 
पुलिन्दी, यथा —
कालिन्दी-पुलिने पश्य पुलिन्दी पुलकाचिता ।
हरेर् दृक्-चापलं वीक्ष्य सहजं या विघूर्णते ॥४.९.२१॥
 
 
अनुवाद
पुलिन्द स्त्रियाँ: "देखो! यमुना तट पर हरि की चंचल आँखों को देखकर पुलिन्द स्त्रियाँ रोंगटे खड़े होकर इधर-उधर घूम रही हैं।"
 
Pulinda women: "Look! The Pulinda women are running here and there with goosebumps on seeing Hari's playful eyes on the banks of Yamuna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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