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श्लोक 4.9.1  |
पूर्वम् एवानुशिष्टेन विकला रस-लक्षणा ।
रसा एव रसाभासा रस-ज्ञैर् अनुकीर्तिताः ॥४.९.१॥ |
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| अनुवाद |
| जो रस प्रतीत होता है, किन्तु पूर्वोक्त लक्षणों से रहित है, उसे रस के ज्ञाता रसाभास कहते हैं। |
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| That which appears to be Rasa but is devoid of the above mentioned characteristics is called Rasaabhasa by those who know Rasa. |
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