vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस
»
लहर 8: मैत्री-वैर-रस (संगत और असंगत रस)
»
श्लोक 41
श्लोक
4.8.41
एवम् अन्यस्य गौणस्य ज्ञेया कविभिर् अङ्गिता ।
तथा च मुख्य-गौणानां रसानाम् अङ्गतापि च ॥४.८.४१॥
अनुवाद
"इस प्रकार, बुद्धिमान लोग समझते हैं कि कैसे एक गौण रस प्रमुखता प्राप्त कर सकता है, और प्राथमिक तथा अन्य गौण रस गौण हो जाते हैं।"
"Thus, wise people understand how a secondary rasa can become dominant, and the primary and other secondary rasa become secondary."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×