यथा वा —
मुर-मथन पुरस् ते को भुजङ्गस् तपस्वी
लघु-हरम् इति कार्षीर् मा स्म दीनाय मन्युम् ।
गुरुर् अयम् अपराधस् तथ्यम् अज्ञानतो’भूद्
अशरणम् अतिमूढं रक्ष रक्ष प्रसीद ॥४.६.५॥
अनुवाद
एक और उदाहरण: "हे मुरारी! आपके सामने मैं एक नीच सर्प के अतिरिक्त और क्या हूँ? इस अत्यन्त पतित एवं दुःखी व्यक्ति पर आप क्रोधित न हों। आप कौन हैं, यह न समझकर मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है। मैं महामूर्ख हूँ, इसलिए मेरा कोई रक्षक नहीं है। अतः आप मेरी रक्षा करें। मुझ पर प्रसन्न हों।"
Another example: "O Murari! What am I before you but a lowly snake? Do not be angry with this utterly degraded and miserable person. I have committed a grave crime by not understanding who you are. I am a great fool, therefore I have no protector. Therefore, please protect me. Be pleased with me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥