श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 6: भयानक-रस (भय)  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.6.11 
इह सन्त्रास-मरण-चापलावेग-दीनताः ।
विषाद-मोहापस्मार-शङ्काद्या व्यभिचारिणः ॥४.६.११॥
 
 
अनुवाद
"भयानक-रस के व्यभिचारी-भावों में त्रास, मृति, चपाल, अवेगा, दैन्य, विषाद, मोह, अपस्मार और शंक हैं।"
 
"The adulterous emotions of the terrible rasa are fear, death, apprehension, aversion, misery, sadness, delusion, epilepsy and doubt."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)