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श्लोक 8
श्लोक
4.5.8
अथ हितः —
हितस् त्रिधानवहितः साहसी चेर्ष्युर् इत्य् अपि ॥४.५.८॥
अनुवाद
"तीन प्रकार के मित्रवत व्यक्ति क्रोध के पात्र बनते हैं: अनवाहित (असावधान), साहसी (उग्र) और ईर्ष्यालु (द्वेषी)।"
"Three types of friendly people become objects of anger: the careless, the bold, and the jealous."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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