श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 5: रौद्र-रस (क्रोध)  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.5.20 
सोल्लुण्ठ-हास-वक्रोक्ति-कटाक्षानादरादयः ।
कृष्णाहित-हितस्थाः स्युर् अमी उद्दीपना इह ॥४.५.२०॥
 
 
अनुवाद
रौद्र-भक्ति-रस में, क्रोधित होने के उद्दीपन हैं व्यंग्यात्मक हंसी, कपटपूर्ण बातें, भौंहें चढ़ाना और कृष्ण के विभिन्न शत्रुओं तथा मित्र व्यक्तियों द्वारा व्यक्त अनादर।
 
In Raudra-bhakti-rasa, the stimuli for anger are sarcastic laughter, deceitful words, raising of eyebrows and disrespect shown by various enemies and friends of Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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