श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 5: रौद्र-रस (क्रोध)  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.5.11 
अथ साहसी —
यः प्रेरको भय-स्थाने साहसी स निगद्यते ॥४.५.११॥
 
 
अनुवाद
उतावला व्यक्ति: “जो व्यक्ति कृष्ण को बलवान समझकर उन्हें खतरनाक स्थान पर भेजता है, उसे साहसी (उतावला) कहा जाता है।”
 
An impatient person: “A person who considers Krishna to be strong and sends him to a dangerous place is called a courageous person (impatient).”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd