तत्र कृष्णो, यथा —
अपराजित-मानिनं हठाच्
चटुलं त्वाम् अभिभूय माधव ।
धिनुयाम् अधुना सुहृद्-गणं
यदि न त्वं समरात् पराञ्चसि ॥४.३.६॥
अनुवाद
कृष्ण से युद्ध करते हुए: "हे माधव! आप बहुत चंचल हैं, लेकिन आप सोचते हैं कि आपको कोई नहीं हरा सकता। यदि आप युद्ध से नहीं भागे, तो मैं अभी आपको पराजित कर आपके मित्रों को प्रसन्न करूँगा!"
Fighting Krishna: "O Madhava! You are very playful, but you think that no one can defeat you. If you do not run away from the battle, I will defeat you right now and please your friends!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥