श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 3: वीर्य-रस (शूरता)  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  4.3.54 
अन्तर्-भावं वदन्तो’स्य दान-वीरे दयात्मनः ।
वोपदेवादयो धीरा वीरम् आचक्षते त्रिधा ॥४.३.५४॥
 
 
अनुवाद
"वोपदेव और अन्य विद्वान दया-वीर को दान-वीर के अंतर्गत वर्गीकृत करते हैं। इस प्रकार वे कहते हैं कि वीरों की केवल तीन श्रेणियाँ हैं।"
 
"Vopadev and other scholars classify Daya-veera under Dana-veera. Thus they say that there are only three categories of heroes."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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