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श्लोक 4.3.50  |
दयोत्साह-रतिस् त्व् अत्र स्थायि-भाव उदीर्यते ।
दयोद्रेक-भृद् उत्साहो दयोत्साह इहोदितः ॥४.३.५०॥ |
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| अनुवाद |
| "स्थायी भाव दयोत्साह-रति है। प्रबल करुणा से युक्त दृढ़ता को दयोत्साह कहते हैं।" |
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| "The permanent emotion is Dayotsaha-rati. Firmness combined with intense compassion is called Dayotsaha." |
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