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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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श्लोक 37
श्लोक
4.3.37
पुजा-दानं —
पुजा-दानं तु तस्मै यद् विप्र-रूपाय दीयते ॥४.३.३७॥
अनुवाद
“स्वयं भगवान को, या देवताओं या ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व करने वाले उनके स्वरूप को जो कुछ दिया जाता है उसे पूजा-दान कहा जाता है।”
“Whatever is offered to the Lord Himself, or to His representations as gods or Brahmanas, is called puja-dana.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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