श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 3: वीर्य-रस (शूरता)  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.3.26 
तत्र बहु-प्रदः —
सहसा दीयते येन स्वयं सर्वस्वम् अप्य् उत ।
दामोदरस्य सौख्याय प्रोच्यते स बहु-प्रदः ॥४.३.२६॥
 
 
अनुवाद
“वह व्यक्ति जो कृष्ण की प्रसन्नता के लिए तुरंत सब कुछ दे देता है, उसे बहु-प्रदा (उदार दाता) कहा जाता है।”
 
“The person who readily gives away everything for the pleasure of Krishna is called Bahu-prada (generous giver).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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