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श्लोक 4.3.26  |
तत्र बहु-प्रदः —
सहसा दीयते येन स्वयं सर्वस्वम् अप्य् उत ।
दामोदरस्य सौख्याय प्रोच्यते स बहु-प्रदः ॥४.३.२६॥ |
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| अनुवाद |
| “वह व्यक्ति जो कृष्ण की प्रसन्नता के लिए तुरंत सब कुछ दे देता है, उसे बहु-प्रदा (उदार दाता) कहा जाता है।” |
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| “The person who readily gives away everything for the pleasure of Krishna is called Bahu-prada (generous giver).” |
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