श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 3: वीर्य-रस (शूरता)  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.3.2 
युद्ध-दान-दया-धर्मैश् चतुर्धा-वीर उच्यते ।
आलम्बन इह प्रोक्त एष एव चतुर्विधः ॥४.३.२॥
 
 
अनुवाद
"वीर या वीर व्यक्ति चार प्रकार के होते हैं: युद्ध-वीर, दान-वीर, दया-वीर और धर्म-वीर। ये भक्त वीर-भक्ति-रस के आलम्बन हैं।"
 
"There are four types of heroes or valiant persons: warriors of war, warriors of charity, warriors of mercy and warriors of religion. These devotees are the objects of heroic devotion."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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