श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 2: अद्भुत-रस (विस्मय)  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.2.3 
तस्य चेष्टा-विशेषाद्यास् तस्मिन्न् उद्दीपना मताः ।
क्रियास् तु नेत्र-विस्तार-स्तम्भाश्रु-पुलकादयः ॥४.२.३॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण के विशिष्ट कर्म उद्दीपन हैं। आँखें पूरी तरह खोलना अनुभव है। लकवा, आँसू और रोंगटे खड़े होना सात्विक भाव हैं।"
 
"Krishna's characteristic actions are stimulation. Opening the eyes completely is experience. Paralysis, tears, and goosebumps are sattvic emotions."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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