अस्मिन्न् आलम्बनः कृष्णस् तथान्यो’पि तद्-अन्वयी ।
वृद्धाः शिशु-मुखाः प्रायः प्रोक्ता धीरैस् तद्-आश्रयाः ।
विभावनादि-वैशिष्ठ्यात् प्रवराश् च क्वचिन् मताः ॥४.१.७॥
अनुवाद
"हास्य-रस में, कृष्ण और कृष्ण-केंद्रित विनोदी क्रियाएँ करने वाले व्यक्ति आलंबन हैं। विद्वान कहते हैं कि वृद्ध और मुख्य बालक सामान्यतः हास्य-रस के आश्रय होते हैं। विशेष परिस्थितियों में, मुख्य व्यक्तित्व इस रस के आश्रय बन जाते हैं।"
"In Hasya-rasa, Krishna and persons performing Krishna-centered humorous actions are the object. Scholars say that the elderly and the main children are generally the objects of Hasya-rasa. In special circumstances, the main personalities become the objects of this rasa."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥