भक्तानां पञ्चधोक्तानाम् एषां मध्यत एव हि ।
क्वाप्य् एकः क्वाप्य् अनेकश् च गौणेष्व् आलम्बनो मतः ॥४.१.५॥
अनुवाद
"ये गौण रस केवल पाँच प्रकार के स्थिति-भाव वाले पाँच प्रकार के व्यक्तियों में ही प्रकट होते हैं। कभी-कभी किसी विशेष परिस्थिति में, इन पाँच प्रकार के व्यक्तियों में से किसी एक को एक विशेष गौण रस का अनुभव हो सकता है, और कभी-कभी इन सभी प्रकारों को एक विशेष गौण रस का अनुभव हो सकता है।"
"These secondary rasas manifest only in five types of persons with five types of situation-bhava. Sometimes, in a particular situation, one of these five types of persons may experience a particular secondary rasa, and sometimes all these types may experience a particular secondary rasa."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥