vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस
»
लहर 1: हास्य-रस (हंसी का परमानंद)
»
श्लोक 24
श्लोक
4.1.24
अपहसितम् —
तच् चापहसितं साश्रु-लोचनं कम्पितांसकम् ॥४.१.२४॥
अनुवाद
“आँखों में आँसू और कंधे हिलाते हुए हँसी को अपहासित (अनियंत्रित हँसी) कहा जाता है।”
“Laughter with tears in the eyes and shaking shoulders is called aphasita (uncontrollable laughter).”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×