| श्री भक्ति रसामृत सिंधु » सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस » लहर 5: माधुर्य-रस (प्रेम भाव) » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 3.5.8  | अस्या रूपं —
मद-चकित-चकोरी-चारुता-चोर-दृष्टिर्
वदन-दमित-राकारोहिणी-कान्त-कीर्तिः ।
अविकल-कल-धौतोद्धूति-धौरेयक-श्रीर्
मधुरिम-मधु-पात्री राजते पश्य राधा ॥३.५.८॥ | | | | | | अनुवाद | | राधा का रूप: "बस राधा को देखो, जो मधुर अमृत की निवासिनी हैं, जिनके आनंदित नेत्र उत्साह से कांपते हुए चकोरी पक्षी की सुंदरता को चुरा लेते हैं, जिनका चेहरा अमावस्या की कीर्ति को पराजित करता है, और जिनकी उत्कृष्ट सुंदरता शुद्ध सोने की चमक से भी अधिक है।" | | | | Radha's form: "Just look at Radha, the abode of sweet nectar, whose blissful eyes steal the beauty of the Chakori bird trembling with excitement, whose face defeats the glory of the new moon, and whose exquisite beauty surpasses the brilliance of pure gold." | | ✨ ai-generated | | |
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