श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 5: माधुर्य-रस (प्रेम भाव)  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.5.29 
अथ मानः —
मानः प्रसिद्ध एवात्र ॥३.५.२९॥
 
 
अनुवाद
“निम्नलिखित उदाहरण में वर्णित मान सर्वविदित है, इसलिए उसे समझाने की आवश्यकता नहीं है।”
 
“The value described in the following example is well known, so it does not need to be explained.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)