श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.4.83 
माद्रेय-नारदादीनां सख्यं प्रीत्या करम्बितम् ।
रुद्र-तार्क्ष्योद्धवादीनां प्रीतिः सख्येन मिश्रिता ॥३.४.८३॥
 
 
अनुवाद
"नकुल, सहदेव, नारद और अन्य में सख्य को प्रीति (दास्य) के साथ मिलाया गया है। शिव, गरुड़, उद्धव और अन्य में प्रीति (दास्य) को सख्य-रस के साथ मिलाया गया है।"
 
"In Nakula, Sahadeva, Narada and others sakhya is mixed with priti (dasya). In Shiva, Garuda, Uddhava and others priti (dasya) is mixed with sakhya-rasa."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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