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श्लोक 3.4.81  |
सङ्कर्षणस्य सख्यस् तु प्रीति-वात्सल्य-सङ्गतम् ।
युधिष्ठिरस्य वात्सल्यं प्रीत्या सख्येन चान्वितम् ॥३.४.८१॥ |
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| अनुवाद |
| "बलराम का सख्य-रस दास्य और वत्सल-रस के साथ मिश्रित है। युधिष्ठिर का वत्सल दास्य और सख्य के साथ मिश्रित है।" |
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| "Balarama's friendship is mixed with dasya and vatsala-rasa. Yudhishthira's love is mixed with dasya and sakhya." |
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