श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  3.4.81 
सङ्कर्षणस्य सख्यस् तु प्रीति-वात्सल्य-सङ्गतम् ।
युधिष्ठिरस्य वात्सल्यं प्रीत्या सख्येन चान्वितम् ॥३.४.८१॥
 
 
अनुवाद
"बलराम का सख्य-रस दास्य और वत्सल-रस के साथ मिश्रित है। युधिष्ठिर का वत्सल दास्य और सख्य के साथ मिश्रित है।"
 
"Balarama's friendship is mixed with dasya and vatsala-rasa. Yudhishthira's love is mixed with dasya and sakhya."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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