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श्लोक 3.4.38  |
सुकुमारेण पौगण्ड-वयसा सङ्गतो’प्य् असौ ।
किशोराभः सदा दास-विशेषाणां प्रभासते ॥३.४.३८॥ |
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| अनुवाद |
| "और जब कृष्ण नाजुक पौगण्ड युग में होते हैं, तो वे दास्य-रस में कुछ प्रकार के व्यक्तियों के लिए कैसर युग में प्रतीत होते हैं।" |
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| "And when Krishna is in the delicate Pauṅganda age, He appears to be in the Kaiser age to certain types of persons in the Dasya-rasa." |
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