श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.4.38 
सुकुमारेण पौगण्ड-वयसा सङ्गतो’प्य् असौ ।
किशोराभः सदा दास-विशेषाणां प्रभासते ॥३.४.३८॥
 
 
अनुवाद
"और जब कृष्ण नाजुक पौगण्ड युग में होते हैं, तो वे दास्य-रस में कुछ प्रकार के व्यक्तियों के लिए कैसर युग में प्रतीत होते हैं।"
 
"And when Krishna is in the delicate Pauṅganda age, He appears to be in the Kaiser age to certain types of persons in the Dasya-rasa."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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