श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.4.28 
यथा —
क्वणित-कनक-किङ्किणी-कलापं
स्मित-मुखम् उज्ज्वल-नासिकाग्रम् उक्तम् ।
कर-धृत-नवनीत-पिण्डम् अग्रे
तनयम् अवेक्ष्य ननन्द नन्द-पत्नी ॥३.४.२८॥
 
 
अनुवाद
एक उदाहरण: "नंद की पत्नी को अपने सामने कृष्ण को देखकर बहुत खुशी हुई, उनकी कमर के चारों ओर छोटी सोने की घंटियाँ झनझना रही थीं, उनकी नाक में मोती और हाथ में मक्खन था।"
 
An example: "Nanda's wife was overjoyed to see Krishna before her, with little golden bells tinkling around his waist, a pearl in his nose and butter in his hand."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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