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श्लोक 3.4.27  |
घ्राणस्य शिखरे मुक्ता नव-नीतं कराम्बुजे ।
किङ्किण्य्-आदि च कट्यादौ प्रसाधनम् इहोदितम् ॥३.४.२७॥ |
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| अनुवाद |
| "मध्य कौमार काल की सजावट उनकी नाक की नोक पर एक मोती, उनके हाथ में मक्खन और उनकी कमर के चारों ओर घंटियाँ हैं।" |
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| "The decorations of the Middle Kumara period are a pearl on the tip of his nose, butter in his hand and bells around his waist." |
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