श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.4.27 
घ्राणस्य शिखरे मुक्ता नव-नीतं कराम्बुजे ।
किङ्किण्य्-आदि च कट्यादौ प्रसाधनम् इहोदितम् ॥३.४.२७॥
 
 
अनुवाद
"मध्य कौमार काल की सजावट उनकी नाक की नोक पर एक मोती, उनके हाथ में मक्खन और उनकी कमर के चारों ओर घंटियाँ हैं।"
 
"The decorations of the Middle Kumara period are a pearl on the tip of his nose, butter in his hand and bells around his waist."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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