श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.4.21 
अस्मिन् मुहुः पद-क्षेप-क्षणिके रुदित-स्मिते ।
स्वाङ्गुष्ठ-पानम् उत्तान-शयनाद्यं च चेष्टितम् ॥३.४.२१॥
 
 
अनुवाद
“कौमार युग के आरंभ में कृष्ण की गतिविधियाँ हैं अपने पैरों को ऊपर उठाना, क्षणिक रोना या हँसना, अपना अंगूठा चूसना और पीठ के बल सोना।”
 
“Krishna's activities at the beginning of the virtuous age are raising his legs, momentary crying or laughing, sucking his thumb and sleeping on his back.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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