श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 4: वात्सल्य-रस (मातृ पितृत्व भाव)  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.4.17 
अथ उद्दीपनाः —
कौमारादि-वयो-रूप-वेशाः शैशव-चापलम् ।
जल्पित-स्मित-लीलाद्याः बुधैर् उद्दीपनाः स्मृताः ॥३.४.१७॥
 
 
अनुवाद
उद्दीपन: "वत्सल-रस के उद्दीपन को कृष्ण के तीन युग कहा जाता है, जो कुमार से शुरू होते हैं, उनका रूप, उनका वस्त्र, उनकी नटखट गतिविधियाँ, उनका हँसना और उनका खेलना।"
 
Stimulation: "The stimulation of Vatsala-rasa is said to be the three ages of Krishna, starting with Kumara, His form, His clothing, His mischievous activities, His laughing and His playing."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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