श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  3.2.93 
अयोग-योगाव् एतस्य प्रभेदौ कथिताव् उभौ ॥३.२.९३॥
 
 
अनुवाद
“प्रीति-रस के दो प्रकार हैं: अयोग (वियोग) और योग (मिलन)।”
 
“There are two types of love: separation and union.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)