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श्लोक 56
श्लोक
3.2.56
एतेषु तस्य दासेषु त्रिविधेष्व् आश्रितादिषु ।
नित्य-सिद्धाश् च सिद्धाश् च साधकाः परिकीर्तितः ॥३.२.५६॥
अनुवाद
“आश्रितों, परिषदों और अनुगों में नित्य-सिद्ध, साधन-सिद्ध और साधक होते हैं।”
“Among the dependents, councils and followers there are the eternally accomplished, the means-accomplished and the seekers.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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