श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.2.45 
व्रजानुगेषु सर्वेषु वरीयान् रक्तको मतः ॥३.२.४५॥
 
 
अनुवाद
“व्रज के अनुगों में रक्तक प्रमुख है।”
 
“Among the followers of Vraj, Raktaka is the chief.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)