श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.2.23 
तत्र शरण्याः —
शरण्याः कालिय-जरासन्ध-बद्ध-नृपादयः ॥३.२.२३॥
 
 
अनुवाद
“कालिय और जरासंध द्वारा कारागार में रखे गए राजा शरण्यों के उदाहरण हैं।”
 
“The kings imprisoned by Kaliya and Jarasandha are examples of Sharanyas.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)