श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  3.2.149 
एषां रूपं, यथा —
अपि मुरान्तक-पार्षद-मण्डलाद्
अधिक-मण्डन-वेश-गुण-श्रियः ।
आसत-पीत-सित-द्युतिभिर् युता
यदु-कुमार-गणाः पुरि रेमिरे ॥३.२.१४९॥
 
 
अनुवाद
"इन बालकों में पारिषदों से भी अधिक वस्त्र, आभूषण, गुण और तेज है। इनका रंग काला, पीला और श्वेत है, और ये द्वारका में खेलते हैं।"
 
"These children have more clothes, ornaments, virtues and brilliance than the council of councillors. Their colours are black, yellow and white, and they play in Dwarka."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)