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श्लोक 133
श्लोक
3.2.133
तुष्टिः —
जाते वियोगे कंसारेः सम्प्राप्तिस् तुष्टिर् उच्यते ॥३.२.१३३॥
अनुवाद
“कृष्ण से वियोग के पश्चात उनसे मिलना तुष्टि कहलाता है।”
“Meeting Krishna after separation from him is called satisfaction.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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