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श्लोक 3.2.129  |
अथ योगः —
कृष्णेन सङ्गमो यस् तु स योग इति कीर्त्यते ।
योगे’पि कथितः सिद्धिस् तुष्टिः स्थितिर् इति त्रिधा ॥३.२.१२९॥ |
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| अनुवाद |
| "कृष्ण से मिलन को योग कहते हैं। योग तीन प्रकार का होता है: सिद्धि, तुष्टि और स्थिति।" |
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| "Union with Krishna is called yoga. Yoga is of three types: siddhi, tushti and sthiti." |
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