श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.2.116 
अङ्गेषु तापः कृशता जागर्यालम्ब-शून्यता ।
अधृतिर् जडता व्याधिर् उन्मादो मूर्च्छितं बुधैः ।
वियोगे सम्भ्रम-प्रीतेर् दशावस्थाः प्रकीर्तिताः ॥३.२.११६॥
 
 
अनुवाद
वियोग में संभ्रम-प्रीति की दस स्थितियाँ हैं: शरीर में गर्मी, पतलापन, अनिद्रा, मन की अस्थिरता, किसी भी चीज़ में रुचि की कमी, सुस्ती (जड़ता), बीमारी (व्याधि), पागलपन (उन्माद), बेहोशी और मृत्यु जैसे लक्षण (मृत्यु)।
 
The ten states of Sambhrama-preeti in Viyoga are: heat in the body, thinness, insomnia, instability of mind, lack of interest in anything, lethargy (inertia), illness (vyadhi), madness (manada), unconsciousness and death-like symptoms (mrityu).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd