श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 2: दास्य-रस (प्रीति और सेवा)  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  3.2.114 
अथ वियोगः —
वियोगो लब्ध-सङ्गेन विच्छेदो दनुज-द्विधा ॥३.२.११४॥
 
 
अनुवाद
"जब कोई भगवान का सान्निध्य प्राप्त कर लेता है और फिर उनसे अलग हो जाता है, तो उस अलगाव को वियोग कहते हैं।"
 
"When one attains the proximity of God and then is separated from Him, that separation is called separation."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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