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श्लोक 3.2.114  |
अथ वियोगः —
वियोगो लब्ध-सङ्गेन विच्छेदो दनुज-द्विधा ॥३.२.११४॥ |
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| अनुवाद |
| "जब कोई भगवान का सान्निध्य प्राप्त कर लेता है और फिर उनसे अलग हो जाता है, तो उस अलगाव को वियोग कहते हैं।" |
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| "When one attains the proximity of God and then is separated from Him, that separation is called separation." |
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