श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.1.6 
तत्रापीश-स्वरूपानुभवस्यैवोरु-हेतुता ।
दासादि-वन्-मनो-ज्ञत्व-लीलादेर् न तथा मता ॥३.१.६॥
 
 
अनुवाद
"ऐसे व्यक्तियों में शांत-रस उत्पन्न होने का मुख्य कारण भगवान के स्वरूप का साक्षात्कार है। भक्तों में दास्य और अन्य रसों के प्रकट होने का मुख्य कारण भगवान की मनोहर लीलाओं का बोध है। यद्यपि शांत-भक्त के साक्षात्कार में यह भी एक कारक है, परन्तु यह मुख्य कारक नहीं है।"
 
"The chief cause of the emergence of the Shanta Rasa in such persons is the realization of the Lord's form. The chief cause of the emergence of the Dasya and other Rasas in devotees is the realization of the Lord's beautiful pastimes. Although this is a factor in the realization of the Shanta Bhakta, it is not the primary factor."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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