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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस
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लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)
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श्लोक 35
श्लोक
3.1.35
अथ स्थायी —
अत्र शान्ति-रतिः स्थायी समा सान्द्रा च सा द्विधा ॥३.१.३५॥
अनुवाद
स्थिर-भाव: "शांत-रस में स्थिर-भाव शांत-रति है। इसके दो प्रकार हैं: साम (साधारण) और सैंड्र (तीव्र)।"
Sthira-bhāva: "The sthira-bhāva in shanta-rasa is shanta-rati. It has two types: sama (ordinary) and sandra (intense)."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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