श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.1.2 
रसामृताब्धेर् भागे’त्र तृतीये पश्चिमाभिधे ।
मुख्यो भक्ति-रसः पञ्चविधः शान्तादीर् ईर्यते ॥३.१.२॥
 
 
अनुवाद
"इस पुस्तक के तीसरे खंड में, जिसे मधुर रस का पश्चिमी महासागर कहा जाता है, शान्त से शुरू होकर पाँच प्रकार के प्राथमिक रसों पर चर्चा की गई है।"
 
"In the third section of this book, called the Western Ocean of Sweet Rasa, the five types of primary rasas are discussed, beginning with Shanta."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)