श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 5: स्थायी-भाव (स्थायी आनंदवर्धक भाव)  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  2.5.69 
तत्र कृष्ण-विभावाः —
याचितः पटिमभिः स्यमन्तकं
शौरिणा सदसि गान्दिनी-सुतः ।
वस्त्र-गूढ-मणिर् एष मूढ-धीस्
तत्र शुष्यद्-अधरः क्लमं ययौ ॥२.५.६९॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण भय का कारण: "जब कृष्ण ने भरी सभा में मित्रतापूर्वक अक्रूर से स्यमंतक मणि माँगी, तो अक्रूर, जो मणि को अपने वस्त्र में छिपाए हुए थे, उत्तर न दे सके। वे कृष्ण से भयभीत हो गए, क्योंकि उन्हें यह समझ आ गया था कि कृष्ण जानते हैं कि उन्होंने मणि छिपाई है। उनका मुँह सूख गया और वे उदास हो गए।"
 
Reason for fear of Krishna: "When Krishna friendly asked Akrura for the Syamantaka gem in the full assembly, Akrura, who had hidden the gem in his clothes, could not answer. He became afraid of Krishna, because he understood that Krishna knew that he had hidden the gem. His mouth went dry and he became sad."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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