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श्लोक 58
श्लोक
2.5.58
कालानवेक्षणं तत्र धैर्य-त्यागोद्यमादयः ।
सिद्धः पूर्वोक्त-विधिना स उत्साह रतिर् भवेत् ॥२.५.५८॥
अनुवाद
"युद्धादि का अर्थ है युद्ध, दान, करुणा और धर्माचरण। युद्धादि के स्थान पर कभी-कभी स्वाभिष्ट (प्रिय) शब्द का प्रयोग किया जाता है।"
"Yuddhadi means war, charity, compassion and religious conduct. Sometimes the word Swabhistha (dear) is used in place of Yuddhadi."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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