"वह प्राथमिक रति जो स्पष्ट रूप से विरोधाभास रहित भावों से स्वयं को पोषित करती है और विरोधाभासी भावों से दुःख से असहनीय रूप से उदास हो जाती है, उसे स्वार्थ-रति (स्वयं को पोषित करना) कहा जाता है।"
"That primary Rati which nourishes itself with apparently non-contradictory emotions and becomes unbearably saddened by the suffering of contradictory emotions is called Svartha-Rati (cherishing the self)."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥