सर्वत्र करुणाख्यस्य रसस्यैवोपपादनात् ।
भवेद् रामायणादीनाम् अन्यथा दुःख-हेतुता ॥२.५.१२६॥
अनुवाद
"यदि करुणा-रस से सुख की प्राप्ति न होती, तो रामायण भावक-भक्तों के लिए दुःख का कारण होती, क्योंकि वह तथा अन्य रचनाएँ सर्वत्र करुणा-रस को प्रकट करती हैं।"
"If the sentiment of compassion did not bring happiness, the Ramayana would be a source of sorrow for the devotees, because it and other works everywhere express the sentiment of compassion."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥