श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 5: स्थायी-भाव (स्थायी आनंदवर्धक भाव)  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.5.118 
श्वेतश् चित्रो’रुणः शोणः श्यामः पाण्डुर-पिङ्गलौ ।
गौरो धूम्रस् तथा रक्तः कालो नीतः क्रमाद् अमी ॥२.५.११८॥
 
 
अनुवाद
बारह रसों के बारह रंग इस प्रकार हैं: श्वेत (शांत), बहुरंगी (प्रीति), केसरिया (प्रेयान या सख्य), किरमिजी (वत्सल), नील (मधुर), हल्का पीला (हास्य), पीला-हरा (अद्भुत), स्वर्ण (वीर), बैंगनी (करुणा), लाल (रौद्र), काला (भयानक) और नीला (बीभत्स)।
 
The twelve colours of the twelve rasas are: white (peaceful), multicoloured (love), saffron (love or friendship), crimson (affectionate), indigo (sweet), light yellow (humorous), yellow-green (wonderful), golden (heroic), purple (compassion), red (furious), black (terrible) and blue (vile).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd