श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 5: स्थायी-भाव (स्थायी आनंदवर्धक भाव)  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.5.116 
अथ गौणः —
हास्यो’द्भुतस् तथा वीरः करुणो रौद्र इत्य् अपि ।
भयानकः स बीभत्स इति गौणश् च सप्तधा ॥२.५.११६॥
 
 
अनुवाद
गौण-रस (द्वितीयक रस): "सात गौण रस हैं: हास्य (हास्य), अद्भुत (आश्चर्य), वीर (उत्साह), करुणा (विलाप), रौद्र (क्रोध), भानायक (भय) और बीभत्स (घृणा)।"
 
Gauna-rasa (secondary rasas): "The seven Gauna rasas are: Hasamya (humor), Adhbhava (surprise), Veer (enthusiasm), Karuna (lamentation), Raudra (anger), Bhanayaka (fear) and Bibhatas (disgust)."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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