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श्लोक 2.5.100  |
किन्त्व् एतस्याः प्रभावो’पि वैरूप्ये सति कुञ्चति ।
वैरूप्यस् तु विभावादेर् अनौचित्यम् उदीर्यते ॥२.५.१००॥ |
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| अनुवाद |
| "यदि विभाव या अन्य तत्वों में कोई विकृति है, तो रति की शक्ति कम हो जाती है। विकृति का अर्थ है कि विभाव या अन्य तत्वों में अनुपयुक्त तत्व हैं।" |
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| "If there is any distortion in the vibhava or other elements, the power of Rati is reduced. Vikruti means that there are unsuitable elements in the vibhava or other elements." |
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