| श्री भक्ति रसामृत सिंधु » सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस » लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ) » श्लोक 99 |
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| | | | श्लोक 2.4.99  | अथ (१५) मृतिः —
विषाद-व्याधि-सन्त्रास-सम्प्रहार-क्लमादिभिः ।
प्राण-त्यागो मृतिस् तस्याम् अव्यक्ताक्षर-भाषणम् ।
विवर्ण-गात्रता-श्वास-मान्द्य-हिक्कादयः क्रियाः ॥२.४.९९॥ | | | | | | अनुवाद | | "दुःख, रोग, भय, मार या थकावट के कारण प्राण त्यागना मृत्यु कहलाता है। इस अवस्था में अस्पष्ट वाणी, शरीर का रंग बदलना, कमज़ोर साँसें और हिचकी आती हैं।" | | | | "Death is the loss of life due to grief, disease, fear, beating or exhaustion. This condition is accompanied by slurred speech, discolouration, weak breathing and hiccups." | | ✨ ai-generated | | |
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