| श्री भक्ति रसामृत सिंधु » सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस » लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ) » श्लोक 56 |
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| | | | श्लोक 2.4.56  | घोर-सत्त्वेन, यथा —
अदूरम् आसेदुषि वल्लवाङ्गना
स्वं पुङ्गवीकृत्य सुरारि-पुङ्गवे ।
कृष्ण-भ्रमेणाशु तरङ्गद्-अङ्गिका
तमालम् आलिङ्ग्य बभूव निश्चला ॥२.४.५६॥ | | | | | | अनुवाद | | क्रूर पशुओं का आतंक: "जब वृषासुर बैल का रूप धारण करके उनके पास आया, तो कुछ गोपियाँ काँपने लगीं। अचानक एक तमाल वृक्ष को कृष्ण समझकर वे उससे लिपट गईं और हिल भी नहीं सकीं।" | | | | Terror of ferocious animals: "When Vrishasura came to them in the form of a bull, some of the gopis began to tremble. Suddenly, mistaking a tamala tree for Krishna, they clung to it and could not move." | | ✨ ai-generated | | |
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