आगन्तुकस् तु यो भावः पटादौ रक्तिमेव सः ।
तैस् तैर् विभावैर् एवायं धीयते दीप्यते’पि च ॥२.४.२५५॥
अनुवाद
"जिस प्रकार श्वेत वस्त्र पर लाल रंग लगाने से वह लाल दिखाई देता है, उसी प्रकार भोगगत भाव विभिन्न कारणों से भक्तों में स्थित होकर दृश्यमान हो जाते हैं।"
"Just as applying red colour to a white cloth makes it appear red, similarly the sensual feelings become visible in the devotees due to various reasons."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥