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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
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लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)
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श्लोक 251
श्लोक
2.4.251
शरीरेन्द्रिय-वर्गस्य विकारणां विधायकाः ।
भावाविर्भाव-जनिताश् चित्त-वृत्तय ईरिताः ॥२.४.२५१॥
अनुवाद
"इन इकतालीस भावों के प्रकट होने से मन में जो परिवर्तन होते हैं, वे शरीर और सभी इंद्रियों में परिवर्तन उत्पन्न करते हैं।"
"The changes that occur in the mind due to the manifestation of these forty-one emotions produce changes in the body and all the senses."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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